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शिवभारतम् • अध्याय 24 • श्लोक 46
आधावत्तरगखुरोत्थरेणुधारा संभाराकुलितमिहांतरें ऽतरिक्षम्। संप्राप्ते धनसमये वद्दन्नवांभः संपृक्तं सर इव धूसरं बभूव ॥
इसी बीच दौड़ने वाले घोडों के खुरों से उड़ाई गई धूल के ढेर से व्याप्त अंतरिक्ष, वर्षा के आरंभ में बहने वाले नवीन पानी से परिपूर्ण सरोवर के सामान धूसर हो गया था।
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