महसां राशिरिंगालो हीरवर्मा महाभुजः । तथा व्याघ्रो भीमनामा प्रवारः सिद्धजित् तथा ॥ गोदो नाम महावीरो जगत्स्थापकवंशजः । तथा परशुरामोऽपि महाद्रिककुलोद्भवः ॥ अपरेऽपि महानीकनाथाः प्रथनपारगाः । शिवराजस्याभिसराः प्रसरन्ति पुरः पुरः ॥
तेजस्वी महाबाहु हिराजी इंगके, भीमाजी वाघ, सिधोजी पंवार, महावीर गोदाजी जगताप, मानो दूसरा परशुराम ही हो ऐसा महाडिक, उसी प्रकार दूसरे युद्धनिपुण बड़े-बड़े सेनानायक तथा शिवाजी राजा के सहायक आगे चलकर आ रहे हैं।
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