तब शिवाजी ने भी शत्रु पक्ष के सुदृढ़ युद्ध विषधारी सेनापति युद्ध करना चाहते हैं ऐसा सुनकर बंधक किले की रक्षा के लिए उग्रसेना को रखकर स्वयं उत्साही एवं उनको जीतने की इच्छा से अत्युस्तुक ऐसा वह चमकदार सैकड़ों शस्त्रों के कारण भयंकर दावा अग्नि के समान शोभायमान उस सेना के साथ वेग से आगे बढ़ गया।
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