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शिवभारतम् • अध्याय 24 • श्लोक 15
निशम्य येदिलस्तेन नरेंद्रेण करे कृतम् । अन्वशोचत् तमचलं फणी फणमिवोन्नतम् ॥
अपने उन्नत फन को गरुड़ के द्वारा पकड़ने पर जिस प्रकार सांप को दुख होता है उसी प्रकार उस उत्कृष्ट किले को "उस राजा ने अधीन कर लिया है" ऐसा ऐसा सुनकर आदिलशाह दुखी हुआ।
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