खराटे, पांडरे, अजिंक्य जाधवराव, हिलाल और सैफखान को मैं यमलोक भेजता हूं, ऐसी अपने सेनापति की प्रतिज्ञा को सुनकर शिवाजी ने स्वयं अपने दूत के माध्यम से उसको तुरन्त संदेश प्रेषित किया।
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