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शिवभारतम् • अध्याय 23 • श्लोक 8
खराटं पांडरं चाथ यादवं च सुदुर्जयम् । हिलालं सैफखानं च विधास्ये शमनातिथिम् ॥ सेनापतेरिमां सन्थां समाकर्ण्य शिवः स्वयम् । तस्मै निजेन दूतेन द्रुतमेतदवेदयत् ॥
खराटे, पांडरे, अजिंक्य जाधवराव, हिलाल और सैफखान को मैं यमलोक भेजता हूं, ऐसी अपने सेनापति की प्रतिज्ञा को सुनकर शिवाजी ने स्वयं अपने दूत के माध्यम से उसको तुरन्त संदेश प्रेषित किया।
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