तब अफजलखान की आज्ञा से युद्धपरायण शत्रुओं द्वारा देश की की हुई दुर्दशा को सुनकर, युद्ध के लिए उत्साहित, विख्यात, स्वामिकार्यनिष्ठ, पराक्रमी, गरुड की तरह वेगवान् शिवाजी का सेनापति सात हजार घुड़सवार एवं पदातियों के साथ लौट आया और उस पराक्रमी सेनापति को जीतने की इच्छा से शिवाजी के सुखसम्पन्न देश में चला गया।
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