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शिवभारतम् • अध्याय 23 • श्लोक 7
ततः शिवस्य सेनानी श्रुत्वा तां देशदुःस्थताम् । कृतामायोधनपरैः परैरफजलाशया ॥ सहितः सप्तिभिः सप्तसाहसैः पत्तिभिस्तथा । संपरायपरः श्रीमान् स्वामिकार्याभियोगवान् ॥ परावृत्य महाबाहुर्महाबाहुजिगीषया । प्रायात् पतगराहाः शिवराष्ट्रमनामयम् ॥
तब अफजलखान की आज्ञा से युद्धपरायण शत्रुओं द्वारा देश की की हुई दुर्दशा को सुनकर, युद्ध के लिए उत्साहित, विख्यात, स्वामिकार्यनिष्ठ, पराक्रमी, गरुड की तरह वेगवान् शिवाजी का सेनापति सात हजार घुड़सवार एवं पदातियों के साथ लौट आया और उस पराक्रमी सेनापति को जीतने की इच्छा से शिवाजी के सुखसम्पन्न देश में चला गया।
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