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शिवभारतम् • अध्याय 23 • श्लोक 5
अस्मिन्नवसरे स्वामिकार्यकनिहितात्मना । वैराटवर्तिना तेन यवनेनाभिमानिना ॥ प्रहिताः स्वहिताः सैन्यपतयस्तीवविक्रमाः उपचक्रमिरे शैवं राष्ट्रमाक्रमितुं क्रमात् ॥
इस अवसर पर स्वामिकार्य में अपने प्राणों को न्योछावर करने वाले उस वाई प्रान्त में स्थित अभिमानी यवन द्वारा प्रेषित अपना हित करने वाले एवं महापराक्रमी सेनापति शिवाजी के देश पर क्रम से आक्रमण करने लगे।
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