इस अवसर पर स्वामिकार्य में अपने प्राणों को न्योछावर करने वाले उस वाई प्रान्त में स्थित अभिमानी यवन द्वारा प्रेषित अपना हित करने वाले एवं महापराक्रमी सेनापति शिवाजी के देश पर क्रम से आक्रमण करने लगे।
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