अपने सैनिकों के साथ पन्हाळ किले पर गर्व से आकर वहां सेना रखकर शिवाजी ने वह संपूर्ण रात दिन की तरह व्यतीत करके वहां के तट, महल, कुएं, सुन्दर उद्यान, विशाल तालाबों द्वारा वृद्धिंगत उस किले की अनुपम शोभा को बारंबार देखा।
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