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शिवभारतम् • अध्याय 23 • श्लोक 48
दर्यादेत्य प्रणालाचलशिरसि शिवः सैनिकैरात्मनीनैः । न्यस्य॑स्तस्मिन्ननीकं दिनमिव निखिलां यामिनीं तामतीत्य ॥ प्राकारागारवापीविलसदुपवनापारकासारगुर्वीम् । दृष्टां दृष्टां मुहस्तां श्रियमतुलतरां पार्वतीयामपश्यत् ॥ इत्यनुपुराणे सूर्यवंशे निधिनिवासकरपरमानन्दप्रकाशितायां शतसाहस्यां संहितायां प्रणालाद्रिग्रहो नाम त्रयोविंशोऽध्यायः ।
अपने सैनिकों के साथ पन्हाळ किले पर गर्व से आकर वहां सेना रखकर शिवाजी ने वह संपूर्ण रात दिन की तरह व्यतीत करके वहां के तट, महल, कुएं, सुन्दर उद्यान, विशाल तालाबों द्वारा वृद्धिंगत उस किले की अनुपम शोभा को बारंबार देखा।
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