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शिवभारतम् • अध्याय 23 • श्लोक 47
सहास्य भर्ता द्विषतामसह्यस्तभ्यो गृहीतं सपदि प्रसा। अध्यास्य विध्याचलतुल्यकायं प्रभुः प्रणालाचलमैक्षतायम्॥
शत्रुओं के लिए असहनीय इस सह्याद्री के स्वामी शिवाजी ने उनके समीप से बलात् तत्काल अधीन किए हुए विंध्याचल के समान उस पन्हाळ किले पर चढ़कर उसको देखा।
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