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शिवभारतम् • अध्याय 23 • श्लोक 46
शरैः शिवानीकचर प्रयुक्तैर्निपेतुषा शैलजुषा जनेन । मन्येऽधमणप्रतिमेन भर्ते प्रत्यर्पितोऽभूदाशतो धनौघः ॥
शिवसैनिकों द्वारा छोड़े गए बाणों से मरने वाले दुर्गवासियों ने मानों ऋण की तरह उपभोग किए गए धन को धनकोष से पुनः दे दिया।
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