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शिवभारतम् • अध्याय 23 • श्लोक 43
तडित्समानाः सुतरां रणन्तः प्रोत्क्षिप्यमाणाः शिवसैनिकौघैः । उल्काशरास्तत्र तथा निपेतुः परे यथा चेतसि नो चिचेतुः ॥
अकाशीय विद्युत् की तरह अत्यन्त आवाज करने वाले शिवाजी के सैनिकों द्वारा फेंके हुए उल्का बाण शत्रु पर इतने गिरें की उसकी शत्रु को कल्पना भी नहीं थी।
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