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शिवभारतम् • अध्याय 23 • श्लोक 42
आग्नेययन्त्रोदरनिः सृतानां नवोदितार्कप्रभविग्रहाणाम् । कदम्बकैरायसकंदुकानां कुतूहलान्यादित संगरश्रीः ॥
तत्क्षण उदित हुए सूर्यबिंब की तरह लाल इस प्रकार तोप से निकलने वाले लोहे के गोलों की वर्षा से युद्ध को आश्चर्यचकित करने वाली शोभा प्राप्त हो गयी।
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