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शिवभारतम् • अध्याय 23 • श्लोक 4
बलादफजलं नाम दनुजं हन्तुमुद्यतः । प्रस्थितोऽमित्रविजयी जयवल्लीं यदा शिवः ॥ तदा तदाशया तूर्ण प्रस्थितः पृतनापतिः । द्विपां बबंध राष्ट्राणि बभञ्ज नगराणि च ॥
कवीन्द्र बोला - अफजलखान नामक राक्षस को बल से मारने के लिए सज्ज होकर शत्रुनेता शिवाजी जब जयवत्ली के लिए निकला तो उसकी आज्ञा से सेनापति ने तुरन्त प्रस्थान करके शत्रु के प्रान्तों को अधीन कर लिया और नगरों को नष्ट कर दिया।
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