अथ खट्वाङ्ङ्गकं मायावनीं रामपुरं पुनः । कलधीतं बाल्लवं च तथा हलजयन्तिकाम् ॥ अष्टिं चाष्टं वटग्रामं वेलापुरमुदंबरम् । मसूरं करहाटं च शूर्प ताम्र च पल्लिकाम् ॥ नेरलं कामनगरीं विश्रामपुरमप्युत । सवाहमूरणं कोलं करवीरपुरं तथा ॥ बलैराक्रम्य स बली बलीनादाय भूरिशः। प्रयच्छन्नभयं वीरो न्यदधान्निजशासने ॥
तत्पश्चात् खटाव, मायणी, रामपुर, कलेढोण, बाल्लव, हलजयंतिका, अष्टी, अष्टे, वडगांव, बेलापुर, औदुंबर, मसूर, कराड़, सुपें, तांबे, पाली, नेरलें, कामेरी, बिसापुर, सावे, उरण, कोके और कोल्हापुर, इन स्थलों पर बलवान् वीरों ने सेना के साथ आक्रमण करके उनके पास से अत्यन्त कर लेकर और उनको अभय प्रदान करके उन स्थलों को अपने शासन में लायें।
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