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शिवभारतम् • अध्याय 23 • श्लोक 35
ततोऽफजलविध्वंसादवसन्नावनाश्रयी । भृशं भृशबलानीकैः पुण्यदेशादपासितौ ॥ उभौ नायकनामानौ राजानी यादवान्विती । खेलकर्णक्रीतपुत्रं हिलालं विश्रुतं क्षिती ॥ पुरस्कृत्याभयं प्राप्य प्रपद्य च महाशयम् । न्यषेवेतां विशेषेण शिवतातिममुं शिवम् ॥
तत्पश्चात्, अफजलखान के विध्वंस के कारण धैर्य के नष्ट होने से तथा आश्रय से रहित हुए नायक नाम के दोनों राजाओं को जाधवराव के साथ भोसले की सेना ने पुणे प्रान्त से भगा देने के कारण खेलकर्ण का क्रीतपुत्र जो विख्यात हिलाल है, उसको आगे करके तथा उसके द्वारा अभयदान प्राप्त करके, महाशय एवं अत्यन्त दयालु शिवाजी की शरण में आकर उसका आश्रय प्राप्त किया।
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