तत्पश्चात्, अफजलखान के विध्वंस के कारण धैर्य के नष्ट होने से तथा आश्रय से रहित हुए नायक नाम के दोनों राजाओं को जाधवराव के साथ भोसले की सेना ने पुणे प्रान्त से भगा देने के कारण खेलकर्ण का क्रीतपुत्र जो विख्यात हिलाल है, उसको आगे करके तथा उसके द्वारा अभयदान प्राप्त करके, महाशय एवं अत्यन्त दयालु शिवाजी की शरण में आकर उसका आश्रय प्राप्त किया।
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