स नृपः श्रीपतिः साक्षादद्राक्षीदालयं श्रियः । डालयं नाम नगरं नामनिर्वासिताहितः ॥
साक्षात् लक्ष्मीपति वह राजा केवल नाममात्र से ही शत्रुओं को भगाकर लक्ष्मी के घर श्चाल्य नामक नगर में पहुंच गया।
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