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शिवभारतम् • अध्याय 23 • श्लोक 30
शिवोऽपि विहितद्वेषादल्लीशाहात्सुदुर्मतेः । बली बलेन विषयं क्षिप्रमादातुमुद्यतः ।। प्रस्थानभेरीझांकारझांकारितदिगन्तरः । प्रभावी बहुभिः सैन्यैर्वैराटं स्थानमासदत् ॥
बलवान् एवं प्रतापी शिवाजी भी अपने से द्वेष करने वाले एवं अत्यन्त दुष्ट बुद्धि आदिलशाह से बलात् देश को शीघ्र अधीन करने के लिए सज्ज होकर, प्रस्थान दुंदुभी के घोष से दिशाओं को प्रतिध्वनित करके साथ में विशाल लेकर वाई प्रान्त पहुंच गया।
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