उस प्रकार छोटे भाई को छोड़कर आने से लज्जित होकर अफजलखान का पुत्र, पिता द्वार वाईप्रान्त में स्थापित हाथी, घोड़े, सामग्री, खजाना एवं कुछ योद्धाओं को साथ लेकर दुःखी अंतःकरण से वहां से तत्काल निकल गया।
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