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शिवभारतम् • अध्याय 23 • श्लोक 25
तव दृष्टचरैवेयमटवी गाढसंकटा। अतोऽस्मानप्रतो भूत्वा नय केनचिदध्वना ॥
मुसेखान बोला - यह गहन एवं दुर्गम अरण्य तूने पहले देखा ही है। अतः अग्रणी होकर किसी मार्ग से हमें बाहर लेकर चल।
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