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शिवभारतम् • अध्याय 23 • श्लोक 24
मुसेखानस्ततस्तत्र दृष्ट्वा काकुरवाकुलम् । ऊधे करुणयैवेनं नीचीकृतनिजस्वरः ॥
तत्पश्चात् वहां उसको काकुध्वनि से बोलता हुआ देखकर मुसेखान ने अपने स्वर को धीमा करके उसको करुणा से बोला।
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