पुरा कर्णेजपीभूय पुनः पुनरुपेयुषा । मिथ्यानुलापिना नित्यं निजच्छद्यापलापिना ॥ त्वयैवानीयाफजलः स महानीकनायकः । सहसा सहितोऽस्माभिः कालानलमुखे हुतः ॥
पहले चुगलखोर बनकर बारंबार आकर, सदा झूठ बोलकर एवं अपने कपट को छिपाकर उस महासेनापति अफजलखान को लाकर हमारे सहित उसकी प्रलयाग्नि के मुख में अचानक आहुति दे दी।
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