ततोऽरिसैन्यादानीतान् सौवर्णान् राजतान् पणान् । मञ्जूषान्तरनिक्षिप्तान् रत्नराशीननेकशः ॥ तथा मुक्तामयान् हारान् हेमभारांश्च भूरिशः । स कुबेरगृहाकारे कोषागारे न्यधापयत् ॥
फिर शत्रु की सेना से लाए गए सोने एवं चांदी के सिक्के को, पेटियों में रखें हुए स्थायी रत्नों के समूह को, उसी प्रकार मोतियों के हार और सोने के अनेक ढेर उसने कुबेर के घर की तरह अपने कोषागार में रखवा दिये।
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