वह पर्वत युक्त प्रदेश पदातियों के लिए अनुकूल किन्तु घुड़सवारों के लिए प्रतिकूल था। अतः उन यवनों के मनोरथ भग्न होने से वे भय के सागर में डूब गये।
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