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शिवभारतम् • अध्याय 23 • श्लोक 15
स आरोहः सोऽवरोहः स पन्थाः सा महावनी। स विरोधी स परिधिः सा निशा स पराभवः ॥ स वैषः स च संत्रासावेशः साप्यसहायता । जयवल्लीपरिसदादमी कथमपासरन् ॥
पण्डित बोलें - वह चढ़ाई, वह अवतरण, वह दुर्गम मार्ग, वह महारण्य, वह विरोधी, वह सीमा, वह भीषण रात्रि, वह पूर्ण पराभव, वह कंपकपाती अवस्था और वह असहाय स्थिति इस प्रकार जयवल्ली के चारों तरफ का स्थान होते हुए भी वे किस प्रकार भाग गए।
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