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शिवभारतम् • अध्याय 23 • श्लोक 1
अथ तत्तच्छिरोवेष्टश्लिष्टदोर्द्धयपृष्ठकान् । उष्णक्लान्तान्निरुष्णीपान्नमग्रीवान् विचेतसः ॥ विकृष्टान् सैनिकैः स्वीयैः परसेनापतीन् पुरः । पुंजीभूतान् प्रतापाद्री शिवराजो व्यलोकत ॥
कवीन्द्र बोले - तत्पश्चात् उन उनकी पगड़ी से पीछे दोनों हाथों से बंधे हुए, धूप से निस्तेज मुंहवाले, पगड़ी रहित, नीचे गर्दन किए हुए, खिन्न मन वाले ऐसे शत्रुपक्ष के सेनापति अपने सैनिकों को खींचकर अपने सामने इकट्ठे किए हुओं को शिवाजी ने देखा।
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