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शिवभारतम् • अध्याय 22 • श्लोक 9
सर्वतः संवृतपथः पर्वतः क्व गमिष्यथ । आस्तिष्ठत प्रहरत प्रतीपान् परितः स्थितान् ॥
चारों ओर से पर्वत का मार्ग बंद कर दिया है तो तुम कहां जाओगे? अरे! खड़े रहो और चारों ओर स्थित शत्रुओं को मारो।
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