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शिवभारतम् • अध्याय 22 • श्लोक 8
तृणीकृत्यात्मनः प्राणान् स्वामिकार्यचिकीर्षया । स गतोऽफजलस्तर्हि वयं सर्वेऽपि किं गताः ॥
मुसेखान बोला - स्वामिकार्य करने की इच्छा से अपने प्राणों को तिनके के समान मानकर अफजलखान यदि मर भी गया तो क्या हम सब भी मर गयें?
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