तब सेना के अपने सभी सैनिकों के संकट में फंसने के कारण से गर्वरहित एवं बल से नष्ट होकर भागती हुई अपनी सेना को देखकर, स्वामिभाव, शक्तिमान्, अत्यन्त क्रोधी, नाक को ऊपर चढ़ाया हुआ एवं मुंह को फुलाकर, विस्तीर्ण अंजली के समान आंखों से युक्त, हाथी के सूंड के समान भुजाओं एवं भयंकर स्वर से युक्त वह मुसेखान पठान उनको रोककर बोलने लगा।
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