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शिवभारतम् • अध्याय 22 • श्लोक 7
अथ कृच्छ्रगतान् सर्वान् गतगर्वान् गतौजसः । सैन्यान्तर्वर्तिनस्सैन्यान् वीक्ष्य विद्रवतो निजान् ॥ भक्तिमान् स्वामिनि मृधे शक्तिमानतिकोपनाः । स्फुरदुद्धोणवदनः पृथुप्रसूतिलोचनः ॥ क्रूरः करिकराकारकरः प्रतिभयस्वरः । स्थिरीकृत्य मुसेखानः पठानः स्वयमब्रवीत् ॥
तब सेना के अपने सभी सैनिकों के संकट में फंसने के कारण से गर्वरहित एवं बल से नष्ट होकर भागती हुई अपनी सेना को देखकर, स्वामिभाव, शक्तिमान्, अत्यन्त क्रोधी, नाक को ऊपर चढ़ाया हुआ एवं मुंह को फुलाकर, विस्तीर्ण अंजली के समान आंखों से युक्त, हाथी के सूंड के समान भुजाओं एवं भयंकर स्वर से युक्त वह मुसेखान पठान उनको रोककर बोलने लगा।
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