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शिवभारतम् • अध्याय 22 • श्लोक 40
केचित् संयति पातिताः सकुतुकं केचिच्च विद्राविताः । संरब्धेन शिवेन ते प्रतिभटाः केचिच्च बन्दीकृताः ॥ एतत्तत्र जगत्रयस्थितिपरे राजन्यलीलाधरे । दुष्टध्वंसकरे धराभयहरे चित्रं न विश्वम्भरे ॥ इत्यनुपुराणे सूर्यवंशे कवींद्रपरमानन्दप्रकाशितायां शतसाहश्यां संहितायां अफजलसैन्यभ‌ङ्गो नाम द्वाविंशोऽध्यायः ॥
कुछ को युद्ध में मार दिया, कुछ को कौतुक के साथ भगा दिया और कुछ शत्रु योद्धाओं को क्रोधित शिवाजी ने जेल में डाल दिया, तीनों लोगों की रक्षा करने वाले, दुष्टों का नाश करने वाले, पृथ्वी के भय को समाप्त करने वाले एवं क्षत्रिय लीला करने वाले विश्वभर के लिए क्या यह आश्चर्य कारक नहीं है?
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