इस प्रकार शत्रु सेना को जीतकर उस पदाति के सभी सेनानायक आनन्दित एवं अतिशय गर्व से युक्त हो गये। फिर वेग से कैद किए गए उन शत्रु के सेनापतियों को पग-पग पर आगे ढकलते हुए उनको शिवाजी के दर्शन करवाये।
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