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शिवभारतम् • अध्याय 22 • श्लोक 31
युध्यध्वं मां भृशवलं भ्रातरं शाहभूभुजः । मम्बो वदन्निदं तत्र बत बन्धादमुच्यत ।।
शहाजीराजा का भाई जो मैं भोंसले हूं, मेरे से युद्ध करो, इस प्रकार बोलते हुए मंबाजी को वहीं पर जन्म बंधन से मुक्त कर दिया।
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