मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिवभारतम् • अध्याय 22 • श्लोक 3
अत्रान्तरे परेऽप्युच्चैः पटहेन प्रणादिना । हतोऽ फजल इत्येव सहसा प्रतिबोधिताः ॥ सज्जमानास्साभिमानान् संरब्धान् प्रतिरुन्धतः । तान् पत्तीन् पर्वतोपान्तादेतानैक्षन्त सर्वतः ॥
इस बीच शत्रुओं को भी अफजलखान मारा गया यही बात उच्चध्वनि से बजनेवाली बुंदुभी के द्वारा सहसा ज्ञात होने पर वे सज्ज हो रहे थे कि तभी पर्वत के तट से आये हुए अभिमानी, संरब्ध एवं आक्रमण करने वाले पदाति चारों ओर से दिखाई दिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें