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शिवभारतम् • अध्याय 22 • श्लोक 24
कश्चिन्नियुध्यतात्युच्चैर्द्विषता द्विदलीकृतः । वीरो विपर्यस्तवपुर्जरासन्ध इवापतत् ॥
मुष्टियुद्ध करने वाले किसी वीर शत्रु के दो टुकड़े होने के कारण वह जरासंध के समान विपरीत होकर गिर गया।
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