कमकोजी सोळंखे, येसाजी कंक, तानाजी मालुसरे, कोंडाजी, वरखल और रामजी पांगारकर, ये पांच अग्नि के समान तेजस्वी वीरों ने अकेले हजारों पदातियों के साथ तथा उसी पराक्रम से विख्यात एवं पांच हजार पदातियों के साथ विद्यमान नारायण ब्राह्मण, इन सभी योद्धाओं तथा महायोद्धाओं ने वेग से आकर वन के मध्यभाग में स्थित, अनेक योद्धाओं से युक्त शत्रु की सेना को चारों ओर से घेर लिया।
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