उस समय उनके क्रोधयुक्त शब्दों से, घोड़ों के हिनहिनाने से, युद्ध के आवेश से, बड़े हाथियों द्वारा किए गए प्रचंड चीत्कार से, छडी के प्रहार से बजने वाले नगाड़ों की तीव्र ध्वनि से, विविध वाद्यों के भयानक आवाजों से, उसी प्रकार चारों से अचानक विचलित होकर गुफाओं से बाहर निकले हुए, वाद्य, भालू, जंगली पक्षी, भेड़िया, गेड़े, सुअर आदि गगनभेदी असंख्य कोलाहल से अत्यन्त वेग से परिपूर्ण हुए उस अत्यन्त दुर्गम अरण्य की प्रतिध्वनि के द्वारा उद्धट सैनिकों को अनेक बार धमकाया गया।
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