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शिवभारतम् • अध्याय 22 • श्लोक 17
ततः पुरः प्रणुन्नाच्चो मुसेखानोऽत्यमर्षणः । तरस्वी प्रतिजग्राह पृषत्कैः परसैनिकान् ॥
तत्पश्चात् अत्यन्त क्रोधित एवं वेगवान् मुसेखान ने अपने घोड़े को आगे ले जाकर शत्रु के सैनिकों पर बाणों की वर्षा की।
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