मध्य-मध्य में उबड़-खाबड़ अनेक विस्तीर्ण पत्थरों से व्याप्त घोड़ों के खुरों के आघात से उड़ने वाली चिंगारियों से पूर्ण, पैर के फिसलने से या ठोकरें खाकर गिरने वाले चपल लोगों के भीड़ से व्याप्त वह भूमि उसके हाल-चाल से कंपित हो गई।
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