मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिवभारतम् • अध्याय 22 • श्लोक 15
अन्तरादन्तुरानेकप्रसूतप्रस्तराविलम् । तुरङ्गमखुराघातोत्पतदग्निकणाकुलम् ॥ स्यद्वत्स्खलत्पदपतज्जंघालजनसंकुलम् । अभूत् प्रचलने तेषां प्रचलं तन्महीतलम् ॥
मध्य-मध्य में उबड़-खाबड़ अनेक विस्तीर्ण पत्थरों से व्याप्त घोड़ों के खुरों के आघात से उड़ने वाली चिंगारियों से पूर्ण, पैर के फिसलने से या ठोकरें खाकर गिरने वाले चपल लोगों के भीड़ से व्याप्त वह भूमि उसके हाल-चाल से कंपित हो गई।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें