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शिवभारतम् • अध्याय 22 • श्लोक 11
स्वामिकार्यमकुर्वाणः कुर्वाण खाणमात्मनः । कथं दर्शयतु स्वीयं मुखमात्मजनान्तिके ॥
स्वामिकार्य किये बिना अपनी रक्षा करने वाला मनुष्य, अपना मुंह अपने लोगों को कैसे दिखा सकता है?
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