स्वामिकार्यमकुर्वाणः कुर्वाण खाणमात्मनः । कथं दर्शयतु स्वीयं मुखमात्मजनान्तिके ॥
स्वामिकार्य किये बिना अपनी रक्षा करने वाला मनुष्य, अपना मुंह अपने लोगों को कैसे दिखा सकता है?
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।