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शिवभारतम् • अध्याय 21 • श्लोक 9
शिवोपि तं पुरो वीक्ष्य वृषा वृत्रामिवागतम्। स्मयमानः स्वयं तस्य दृशा दृशमयोजयत्।।
जैसे इन्द्र ने वृत्र को देखा उसी प्रकार शिवाजी ने भी मुस्कुराते हुए सामने स्थित उसकी दृष्टि से दृष्टि को मिलाया।
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