पुनः किले के तट से सिंह की तरह बाहर निकलकर शीघ्र पगों को रखते हुए अत्यन्त समीप आकर खड़े हुए, अंकुशाग्र के समान सुन्दर, विशाल और लंबी दाढ़ी से भयंकर दिखने वाले, धैर्यवान् एवं धैर्वदृष्टि से युक्त शिवाजी को शत्रु ने देखा।
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