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शिवभारतम् • अध्याय 21 • श्लोक 6
उष्णीषेणैव शुचिना व्यभादुत्क्तंसधारिणा। कश्मीरजपुषद्वर्षरंजितेनांगिकेन च ।। शिववर्मा भृशबलः संवृतः शिववर्मणा। तस्य वज्रशरीरस्य किं कार्यं तेन वर्मणा ।।
उत्तम कवच को धारण किया हुआ शिवाजी राजे भोंसले, पुष्पगुच्छ को धारण करने से, सफेद पगड़ी से एवं केसर के छिड़काव किए गए अंगरखे से वह अत्यंत सुशोभित हो रहा था। उस वज्रयुक्त शरीर के लिए उस कवच की क्या जरुरत है?
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