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शिवभारतम् • अध्याय 21 • श्लोक 46
इति निजरिपुमुच्चैः संगरे पातयित्वा, विलसति शिवभूमीवल्लभे शखपाणी। सपदि विजयशंसी व्यभुवानखिलोकीम्, गिरिशिरास गभीरो दुन्दुभिः प्रादुरासीत् ॥ इत्यनुपुराणे परमानन्दकवीन्द्रप्रकाशितायां शतसाहस्यां संहितायामफजलवधो नाम एकविंशोऽध्यायः ॥
इस प्रकार अपने शत्रु को युद्ध में बल से मारकर, सशस्त्र शिवाजी सुशोभित होने लगा तो तीनों लोकों को व्याप्त करने वाली विजय सूचक एवं गंभीर दुंदुभी की ध्वनि किले पर हुई।
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