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शिवभारतम् • अध्याय 21 • श्लोक 44
एकाशीत्याधिकैः पंच दशभिः संमितैः शतैः । शालिवाहे शके संवत्सरे चैव विकारिणि ॥ मासि मार्गे सिते पक्षे सप्तम्यां गुरुवासरे। मध्याह्ने दैवतद्वेषी शिवेनाफजलो हतः ॥
८३-८४. शक १५८१ विकारी संवत्सर के मार्गशीर्ष मास के शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथि तथा गुरुवार के दोपहर को देवों से द्वेष करने वाले अफजलखान को शिवाजी ने जान से मार दिया।
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