काबुकीयेन कंकाभ्यामिंगालेनाभिमानिना । मुरुंबकेन वीरेण तथा करवरेण च ॥ क्रूरेण कांटकेनापि गोकपाटेन च द्रुतम् । बबरण सावेशं युद्धन्तोन्येऽपि पातिताः ॥
कावाजी, दोनों कंकवंशी, अभिमानी इंगळे, वीर मुरुंबक, उसी प्रकार करवर, क्रूर कांटके, गायकवाड़ और शिद्दी बर्बर इन्होंने क्रोध से लड़ने वाले दूसरे शत्रुओं को शीघ्रता से मार दिया।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।