तेषां तेषां च नादेन पूरिते गगनोदरे। मन्दुरायां निरुद्धोऽपि विद्रुतोऽभूद्धरिहरेः ॥
उन-उन मुसलमानों के और उन मराठों की गर्जना से आकाश परिपूर्ण हो गया अश्वशाला में बंधा हुआ इंद्र का घोड़ा भी भाग गया।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।