तब संभाजी, कावजी, काताजी इंगळे, कोडाजी एवं येसाजी ये दोनों कंकवंशी, कृष्णाजी गायकवाड़, सुरजी कांटके, उसी प्रकार शिद्दी, इस प्रकार इन शिवाजी के रक्षक दस वीरों ने गर्जना करके, म्यान से प्रचंड तलवारों को निकालकर, पर्वत जैसे वायु रोकता है, उसी प्रकार उन्होंने वहां शत्रुपक्ष का विरोध किया।
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