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शिवभारतम् • अध्याय 21 • श्लोक 39
तदा संभः काबुकीयः काडूचेंगालसंभवः । कुंडजिच्च यशोजिच्च द्वाविमौ कंकवंशजौ ॥ गोकपाटान्वयः कृष्णः शूरजित् कांटकोपिऽच। तथैव माहिलो जीवो विश्वजिच्च मुरुबकः ॥ संभः करवरस्तद्वदिभरामोऽपि बर्बरः । एते दश महावीराः शिवराजाभिरक्षिणः ॥ कृतक्ष्वेडारवाः कोपनिष्कासितमहासयः । प्रत्यगृह्णन्त तांस्तत्र पवनानिव पर्वताः ॥
तब संभाजी, कावजी, काताजी इंगळे, कोडाजी एवं येसाजी ये दोनों कंकवंशी, कृष्णाजी गायकवाड़, सुरजी कांटके, उसी प्रकार शिद्दी, इस प्रकार इन शिवाजी के रक्षक दस वीरों ने गर्जना करके, म्यान से प्रचंड तलवारों को निकालकर, पर्वत जैसे वायु रोकता है, उसी प्रकार उन्होंने वहां शत्रुपक्ष का विरोध किया।
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