तडित्पातानिव स्यादुपेतानात्मनोऽन्ति के । पातितान्प्रतिवर्वीरैस्तैः खङ्गपाताननेकशः ॥ कदाचित्पट्टिशेनैव कदाचिगाढमुष्टिना। कदाचिद्युगपत्ताभ्यां द्वाभ्यामादत्त स प्रभुः ॥
आकाशीय विद्युत् के समान वेग से अपने पर आने वाले विरुद्ध वीरों के द्वारा किए गए अनेक तलवार के प्रहारों को उस स्वामी ने कभी पट्टे से तो कभी तलवार से और कभी उन दोनों से रोका।
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