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शिवभारतम् • अध्याय 21 • श्लोक 32
ते हतं स्वामिनं वीक्ष्य यवनानीकनायकाः । कुप्यन्तोऽतीव दृप्यन्तो विनिर्धूतायतायुधाः ॥ सय्यदोऽबदुलो नाम बडाहोपि च सय्यदः । रहीमखानोऽफजल भ्रातृपुत्रश्च दुर्मदः ॥ पहीलवानखानोपि महामानी महान्वयः । पीलुजिच्छंकर थोभौ वीरौ महितवंशजौ ॥ चत्वारोन्येपि यवनाः पवनातिगविक्रमाः । बलिनोऽ फजलस्यैते पाणिग्राहाः प्रमाचिनः ॥ ध्वस्ते जंभासुरे सद्यः सुरेश्वरमियासुराः । संभूयाभ्यपतन्सर्वे शिवराजजिघांसवः ॥
वे अपने स्वामी (अफजलखान) को मरा देखकर अब्दुल सय्यद, बड़ा सय्यद, अफजलखान का घमण्डी भतीजा रहीमखान, अत्यन्त अभिमानी और बड़े घर का पहलवानखान, पिलाजी एवं शंकराजी मोहित ये दोनों वीर और वायु से भी अधिक वेगवान्, बलवान् एवं अफजलखान के पृष्ठ रक्षक ये चार एवं अन्य भी उस यवन सेना के नायक अत्यंत क्रोधित एवं गर्व के साथ शस्त्रों को उठाकर जंभासुर के नष्ट होने पर जैसे इन्द्र पर असुर तत्काल आक्रमण करते हैं, उसी प्रकार शिवाजी को जान से मारने की इच्छा से सभी ने मिलकर उन पर आक्रमण किया।
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