वे अपने स्वामी (अफजलखान) को मरा देखकर अब्दुल सय्यद, बड़ा सय्यद, अफजलखान का घमण्डी भतीजा रहीमखान, अत्यन्त अभिमानी और बड़े घर का पहलवानखान, पिलाजी एवं शंकराजी मोहित ये दोनों वीर और वायु से भी अधिक वेगवान्, बलवान् एवं अफजलखान के पृष्ठ रक्षक ये चार एवं अन्य भी उस यवन सेना के नायक अत्यंत क्रोधित एवं गर्व के साथ शस्त्रों को उठाकर जंभासुर के नष्ट होने पर जैसे इन्द्र पर असुर तत्काल आक्रमण करते हैं, उसी प्रकार शिवाजी को जान से मारने की इच्छा से सभी ने मिलकर उन पर आक्रमण किया।
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