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शिवभारतम् • अध्याय 21 • श्लोक 3
एवं विधाय नियमं विधायच्छलमातरम्। दिदृक्षमाणावन्योन्यं तदानीं तौ व्यराजताम्।।
इस प्रकार करार करके एवं अन्दर से कपटभाव से युक्त होकर एक दूसरे से मिलने के इच्छुक वे दोनों उस समय सुशोभित हुए।
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