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शिवभारतम् • अध्याय 21 • श्लोक 27
शिवस्तत्पातितं खड्गं खड्गेनादत्त वै तदा। शिरस्तदधिपस्यापि पट्टिशेन व्यधाद् द्विधा ।।
उसने प्रहार की हुई तलवार को उस समय शिवाजी ने अपने तलवार से रोक लिया और पट्टे से उस अफजलखान के सिर के दो टुकड़े कर दिये।
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